Saturday, May 25, 2024

उत्तराखंड सतरुद्रा ट्रस्ट

Reg.No.IV/921/2019

पर्यावरण संरक्षण

पर्यावरण प्राकृतिक परिवेश और स्थितियों को संदर्भित करता है जिसमें हम रहते हैं। दुर्भाग्य से मानव गतिविधियों के कारण पर्यावरण गंभीर खतरे में आ गया है। इन मानवीय गतिविधियों ने पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। सबसे महत्वपूर्ण बात, यह क्षति पृथ्वी पर जीवित चीजों के अस्तित्व को खतरे में डालती है। बिगड़ते पर्यावरण के हानिकारक प्रभावों को कम करने के कई तरीके हैं। पेड़ लगाने पर बड़े पैमाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। दुर्भाग्य से, निर्माण के कारण कई पेड़ काट दिए गए हैं। लोगों को वन संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए। वन पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण हैं। हमें अपने वनों का संरक्षण करना चाहिए। पर्यावरण को बचाने के लिए मृदा संरक्षण एक और महत्वपूर्ण तरीका है। इसके लिए भूस्खलन, बाढ़ और मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण होना चाहिए। इसके अलावा, मिट्टी के संरक्षण के लिए वनीकरण और वृक्षारोपण भी होना चाहिए। अपशिष्ट प्रबंधन पर्यावरण की रक्षा का एक शक्तिशाली तरीका है। कचरे का उचित निपटान होना चाहिए। प्रदूषण पर्यावरण के लिए शायद सबसे बड़ा खतरा है। धुआं, धूल और हानिकारक गैसें वायु प्रदूषण का कारण बनती हैं। वायु प्रदूषण के ये कारण ज्यादातर उद्योग और वाहन हैं। इसके अलावा, रसायन और कीटनाशक भूमि और जल प्रदूषण का कारण बनते हैं। पर्यावरण को बचाना भी हमारे उद्देश्यों में सबसे ऊपर है और हमने इस दिशा में कुछ पहल की हैं।

पर्यावरण संरक्षण

हमारे ट्रस्ट के प्रमुख उद्देश्यों में पर्यावरण संरक्षण एक है, जिसमें हमारा लक्ष्य समाज में पर्यावरण सम्बन्धी जागरुकता और सम्बन्धित समस्याओं का समुचित समाधान करना है। जिसका शुभारम्भ हमारे ट्रस्ट के "पर्यावरण प्रकोष्ठ" ने देहरादून की अति प्रदूषित एंव मृत प्राय "सुसवा" नदी को प्रदुषण रहित और पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से एक जन आन्दोलन उठाने से किया एवं पांच ग्रामों के ग्राम प्रधान एवं ग्रामवासियों को साथ लेकर अभियान को कार्य रुप देने के लिये "सुसवा पुनर्जीवन संघर्ष समिति" का गठन किया गया। जिसमें ट्रस्ट का एक मार्गदर्शक एवं तकनीकी सहयोगी के रूप मेप्रतिभाग है।

उत्तराखंड सतरुद्रा ट्रस्ट के पर्यावरण प्रकोष्ठ द्वारा 75वें स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त 2021) के अवसर पर बी.एस.नेगी राजकीय इंटर कॉलेज गुजराड़ा देहरादून में बृक्षारोपण किया गया।